राष्ट्र सर्वोपरि: अराजकता, राजनीति और आम नागरिक का संघर्षआज ‘आंदोलन’ और ‘विरोध-प्रदर्शन’
आज ‘आंदोलन’ और ‘विरोध-प्रदर्शन’ के मायने काफ़ी बदल चुके हैं। कभी अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का लोकतांत्रिक माध्यम माने जाने वाले ये साधन आज कई बार कुछ स्वार्थी तत्वों के हाथ की कठपुतली बन जाते हैं। सवाल यह है कि जब विरोध के नाम पर सड़कों पर पत्थर रखे जाएँ, रेल की पटरियाँ उखाड़ी…


