विधाता का विधान: हम केवल पात्र हैं, सूत्रधार तो वो स्वयं है
प्रस्तावना: इस अनंत ब्रह्मांड में हम जो कुछ भी देखते हैं, वह सब उस परमेश्वर की माया का ही विस्तार है। अक्सर मनुष्य अपने जीवन की सफलताओं का श्रेय स्वयं को देता है और विफलताओं पर दुखी होता है, लेकिन सत्य यह है कि हम इस संसार रूपी रंगमंच पर केवल एक छोटे से पात्र…




