धुंध, प्रकृति और सूर्य का सत्य: सेवा और प्रकाश का अडिग प्रवाह
आज जब हम चारों ओर के संसार को देखते हैं, तो कभी-कभी लगता है कि स्वार्थ की आँधी में सत्य और भलाई पीछे छूट रही हैं, मानो गंगा को वापस हिमालय की ओर मोड़ने का प्रयास हो रहा हो। पर परम सत्य यही है कि धाराएँ कभी उल्टे प्रवाह में नहीं बहतीं और सूर्य की…








