चेतना, शक्ति और धर्म: भारतीय मनीषा से युगीन क्रांति का आह्वान
भूमिका: सृजन और शक्ति की दो धाराएँ मानव सभ्यता का इतिहास दो स्पष्ट धाराओं में बहता रहा है—एक धारा सृजन, सत्य और अंतर्मुखी अनुसंधान की है, तो दूसरी शक्ति, विस्तार और भौतिक दोहन की। जब हम अपनी भाषा, शास्त्रों और इतिहास के पन्नों को पलटते हैं, तो यह द्वंद्व केवल पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं…







