जब घड़ा भर जाता है: मौन, शांति और सहज कर्म
श्री रामचंद्र सेवाधाम ट्रस्ट – रतनगढ़ एवं नवलगढ़ “अधजल गगरी छलकत जाए।” पूरा भरा घड़ा छलकता नहीं, ठहर जाता है। हम जीवन भर संसार को समझाने में ऊर्जा गँवाते हैं। चिल्लाते हैं, तर्क करते हैं, अपनी बात मनवाने के लिए संघर्ष करते हैं। पर समझाना इतना कठिन क्यों है? क्योंकि हर व्यक्ति पहले से अपनी…

