यथा दृष्टि, तथा सृष्टि: दृष्टि का आईना और संसार का सत्य
श्री रामचंद्र सेवाधाम ट्रस्ट, नवलगढ़ व रतनगढ़ | लेखक: मुकेश दास, सचिव यथा दृष्टि तथा सृष्टि का अर्थ बहुत सरल है, पर जीवन में उतारना उतना ही कठिन। हम जिस दुनिया में जीते हैं, वह जितनी बाहर दिखती है, उससे कहीं अधिक हमारे भीतर गढ़ी जाती है। ऋषियों ने इसे सूत्र में कहा: “यथा दृष्टि…

