मेरी आध्यात्मिक अनुभूति: एक प्रकाश पुंज की यात्रा
यह शरीर तो मात्र एक माध्यम है, असली संचालक तो वही है। आपदाएँ आईं, मृत्यु का भय भी आया, पर उस अदृश्य कवच ने हर बार थाम लिया। जब नियत साफ हो और सेवा का मार्ग हो, तो ईश्वर स्वयं सारथी बन जाते हैं।

यह शरीर तो मात्र एक माध्यम है, असली संचालक तो वही है। आपदाएँ आईं, मृत्यु का भय भी आया, पर उस अदृश्य कवच ने हर बार थाम लिया। जब नियत साफ हो और सेवा का मार्ग हो, तो ईश्वर स्वयं सारथी बन जाते हैं।

प्रस्तावना: इस अनंत ब्रह्मांड में हम जो कुछ भी देखते हैं, वह सब उस परमेश्वर की माया का ही विस्तार है। अक्सर मनुष्य अपने जीवन की सफलताओं का श्रेय स्वयं को देता है और विफलताओं पर दुखी होता है, लेकिन सत्य यह है कि हम इस संसार रूपी रंगमंच पर केवल एक छोटे से पात्र…