अहंकार से मुक्ति: प्रभु श्रीराम की कृपा और परम आनंद का मार्ग
जैसे ही प्रभु की कृपा से यह ‘मैं’ का भाव विलीन होता है, मनुष्य के भीतर एक अद्भुत रूपांतरण होता है। वह समझ जाता है कि इस संसार की हर पत्ती उनकी मर्जी से हिल रही है। करने वाले भी वही हैं और कराने वाले भी वही।



