जब मैंने ब्रह्मांड को ईश्वर की आँखों से देखा… 🌌

ईश्वर कोई प्रवचन नहीं, ईश्वर एक जीवंत अनुभूति है।
हाल ही में ईश्वर और उनके स्वरूप पर एक गहरा चिंतन हुआ, जिसने मेरे भीतर के ‘मैं’ को पूरी तरह शांत कर दिया। मैं वही अनुभव आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ:
विराट स्वरूप का दर्शन:
मैंने देखा कि यह विशाल पृथ्वी, जिस पर हम अपने अहंकार के महल खड़े करते हैं, वह उस अनंत ब्रह्मांड में एक छोटी सी गेंद के समान है। वह दृश्य मोर की गर्दन जितना गहरा नीला (Peacock Blue) था और पूरा ब्रह्मांड किसी बाहरी सूरज से नहीं, बल्कि अपने ही भीतर के प्रकाश से जगमगा रहा था।
🌀 माया का दलदल:
मैंने अनुभव किया कि यह प्रकृति (माया) कितनी शक्तिशाली है! यह पृथ्वी को अपने मोहक आंचल में लपेटे हुए है। एक समय ऐसा आया जब मुझे लगा कि मैं इस दलदल में खो जाऊँगा, तभी उस ‘अनंत कोटि दूर’ बैठे परमात्मा की आवाज़ आई— “रुको! यह मोह का दलदल है।” उस आवाज़ ने मुझे एक नया जन्म दिया।
🙏 निमित्त मात्र बच्चा:
अब मैं समझ गया हूँ कि मैं कर्ता नहीं हूँ। मैं तो केवल एक ‘निमित्त मात्र बच्चा’ हूँ। हम पहले पिता के अंश थे, फिर माँ के गर्भ में आए और आज इस ‘धरती माँ’ के गर्भ में स्थापित हैं। मृत्यु अंत नहीं है, बल्कि एक और नवीन और उदार जन्म की तैयारी है।
🌱 नित नवीन जीवन:
परमात्मा ने मुझे सेवा के लिए वापस भेजा है। अब मेरा हर कार्य—चाहे वह श्री रामचन्द्र सेवाधाम के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करना हो या जीव-जंतुओं की सेवा—वह उस ईश्वर की इच्छा का पालन है। अब मैं जैसा सोचता हूँ, वैसा होने लगता है, क्योंकि अब वह मेरी नहीं, उसकी इच्छा है।
मेरा संदेश:
ईश्वर कण-कण में है, आपकी हर सांस में है। किसी का बुरा करना, ईश्वर का ही बुरा करना है। आइए, उस ‘अनंत ऊर्जा’ को अपने भीतर महसूस करें और जीवन को हर पल ‘नित नवीन’ बनाएँ।
— श्री मुकेश दास (एक निमित्त मात्र सेवक)
पक्षियों के लिए सहयोग करें
₹ 101.00शिक्षा और छात्रावास निर्माण सेवा कोष
₹ 501.00🌸 श्री रामचन्द्र सेवाधाम ट्रस्ट – सेवा संकल्प 🌸
₹ 1,100.00









