कच्चे घड़े में अगाध जल: आधुनिक शिक्षा का संकट और प्राचीन दृष्टि की अनिवार्यता
आज का समाज एक अजीब विरोधाभास के दौर से गुजर रहा है। साक्षरता की दरें ऊंची हैं, डिग्रियों के अंबार लगे हैं और तकनीकी कौशल का विस्तार अभूतपूर्व है; फिर भी अवसाद, एकाकीपन, आक्रामकता और दिशाहीनता चरम पर हैं। हमने आजीविका के साधन और ‘कैरियर’ बनाने की मशीनें तो तैयार कर लीं, लेकिन एक संवेदनशील…



