माया का भ्रम, सेवा का सच्चा मार्ग
नेपाल की उस भीषण त्रासदी को याद कीजिए, जहां पल भर में गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और हजारों जिंदगियां मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं। उस मंजर ने पूरी दुनिया को एक कड़वा सच सिखाया था—जिस धन, जमीन और अहंकार को इंसान अपनी निजी जागीर मान बैठा था, कुदरत के एक झटके ने उसकी औकात बता दी। न तिजोरियां काम आईं, न बैंक बैलेंस और न ही झूठी शान। प्रकृति ने साफ कर दिया कि जब उसका हिसाब शुरू होता है, तो इंसान के बनाए सारे मायाजाल मिट्टी में मिल जाते हैं।
हैरानी की बात है कि ऐसे महाविनाश देखकर भी इंसान की आंखें नहीं खुलतीं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में संवेदनाएं सुन्न पड़ चुकी हैं। सड़क किनारे तड़पते किसी बेबस इंसान को देखकर लोग नजरें फेर लेते हैं, यह सोचकर कि “कहीं कोई आफत गले न पड़ जाए।” अनैतिक रास्तों से धन बटोरने वाले यह भूल जाते हैं कि अधर्म की कमाई न तो अपनी पीढ़ियों को बचा पाती है और न ही कुदरत के न्याय से बच सकती है।
सत्य का मार्ग-श्री राम सेवा ट्रस्ट
सत्य का मार्ग सदा से कठिन रहा है। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने सब कुछ खोकर श्मशान तक का सफर तय किया, कफन तक के लिए मोहताज हुए, पर उन्होंने धर्म और सत्य का दामन नहीं छोड़ा। असली दौलत वही है जो अंतरात्मा को तृप्ति दे। श्मशान की राख पर फंसे किसी बेजुबान ऊंट की रुकावट दूर करना हो, या किसी संकरे रोल में फंसे कबूतर को नया जीवन देना—करुणा का हर छोटा कदम उस परमात्मा की सच्ची सेवा है।
श्री राम सेवा ट्रस्ट का संकल्प
इन्हीं मानवीय मूल्यों, करुणा और निस्वार्थ भाव को धरातल पर उतारने का संकल्प है श्री रामचंद्र सेवा धाम ट्रस्ट। जब समाज स्वार्थ और लालच की अंधी दौड़ में भटक रहा हो, तब श्री राम सेवा ट्रस्ट पीड़ित मानवता और मूक बेजुबानों की सेवा को ही अपना धर्म मानता है।
खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है। अंत में साथ केवल वही कर्म जाएंगे जो किसी की आंख का आंसू पोंछने और किसी गिरते हुए को संभालने के लिए किए गए हों। आइए, माया के इस भ्रम से जागें और सेवा के इस पुनीत मार्ग से जुड़कर अपनी इंसानियत को जीवित रखें।
आप भी इस सेवा-यज्ञ में अपना योगदान दे सकते हैं — दान करें या स्वयंसेवक बनकर जुड़ें।




