प्रकृति, मनुष्य और तकनीक: क्या हम सब एक ही डोर से बंधे हैं?
हम अक्सर दुनिया को दो स्पष्ट हिस्सों में बाँट देते हैं—एक तरफ सजीव प्रकृति और इंसान, तो दूसरी तरफ निर्जीव मशीनें और आधुनिक तकनीक (Technology)। लेकिन अगर हम थोड़ी गहराई में जाकर, एक दार्शनिक और सार्वभौमिक (Universal) दृष्टि से देखें, तो क्या सचमुच इनमें कोई भेद है? या फिर ये सब एक ही विराट व्यवस्था…











