धर्म, समाज और सेवा: आज की चुनौतियाँ और हमारा दायित्व
आज का समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ भौतिकता की दौड़ में मानवीय संवेदना पीछे छूटती जा रही है। धर्म और समाज के नाम पर होने वाली घटनाएँ, एकांत में रहने वाले संतों और तपस्वियों की सुरक्षा पर उठते प्रश्न, और संवेदनाओं का ह्रास हमें सोचने पर विवश करता है कि हम…








