माया, पाप और मुक्ति: निस्वार्थ सेवा का शाश्वत दर्शन
प्रस्तावनामानव जीवन अनादि काल से इस खोज में भटका है कि यह ब्रह्मांड क्या है, पाप का मूल क्या है, और इस सांसारिक चक्र से बाहर निकलने का रास्ता कहाँ है? सामान्य दृष्टि संसार को केवल भौतिक लाभ-हानि के चश्मे से देखती है, लेकिन जब कोई जीवन की भट्टी में तपकर यथार्थ को समझता है,…










